समझदार बूढ़ा हंस
हंसों का झुंड एक बड़े पेड़ पर रहता था। एक बूढ़े हंस ने तने पर चढ़ती एक छोटी बेल देखी।
उसने कहा, "अभी इसे कुतर दो। एक दिन इसी से शिकारी ऊपर चढ़ेगा।" जवान हंस उस पर हँस पड़े।
बेल मोटी और मज़बूत होती गई। किसी ने उसके बारे में फिर सोचा ही नहीं।
एक रात शिकारी उसी बेल से चढ़ा और सोते हुए पक्षियों पर जाल फैला दिया।
बूढ़े हंस ने फुसफुसाया, "मरे जैसे पड़े रहो। जब वह ज़मीन पर फेंके, तब उड़ जाना!"
उन्होंने वैसा ही किया, और पूरा झुंड सही-सलामत आसमान में उड़ गया।
जिन्होंने तुमसे ज़्यादा देखा है, उनकी सुनो। छोटी मुश्किलें बड़ी हो जाती हैं।
बड़ों की बात माननाक्या आप जानते हैं?
हंस "V" बनाकर उड़ते हैं ताकि हर पक्षी आगे वाले की बनाई हवा में आराम पा सके।
घर पर यह करके देखें
घर के किसी बड़े से पूछो कि उन्होंने मुश्किल से कौन सी एक बात सीखी।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
बूढ़े हंस ने किस बारे में चेताया?
जवाब: पेड़ पर चढ़ती बेल के बारे में
जाल में उसकी तरकीब क्या थी?
जवाब: मरे जैसे पड़े रहो, फिर उड़ो
इसकी सीख क्या है?
जवाब: समझदार बड़ों की सुनो
इस कहानी को जीवंत बनाइए
Superkids ऐप में आपका बच्चा यही कहानी तस्वीरों के साथ पढ़ता है, सुनता भी है, सवालों का जवाब खेल-खेल में देता है, और हर पूरी कहानी पर सितारे कमाता है।
मुफ़्त शुरू करेंकार्ड की ज़रूरत नहीं।