एहसान मानने वाले जानवर
एक दयालु मुसाफिर पुराने सूखे कुएँ के पास से गुज़रा और उसे मदद की पुकार सुनाई दी।
अंदर एक बाघ, एक बंदर, एक साँप और एक सुनार, चारों एक साथ गिरे हुए थे।
उसने एक-एक करके सबको बाहर निकाला। तीनों जानवरों ने दिल से धन्यवाद कहा और चले गए।
बाद में बाघ उसके लिए तोहफे में सोने का हार लाया, और मुसाफिर उसे बेचने सुनार के पास गया।
पर सुनार उस हार को पहचानता था और उसने पहरेदारों से अपने ही बचाने वाले के बारे में झूठी कहानी कह दी।
जानवर दौड़े आए और सच बता दिया। मुसाफिर छूट गया, और सबने देख लिया कि असल में एहसान कौन मानता है।
धन्यवाद कहो और दिल से कहो। भलाई के बदले भलाई बनती है।
कृतज्ञताक्या आप जानते हैं?
भारत के गाँवों के कुएँ पूरे मोहल्ले के साझे होते थे और उनमें नीचे तक सीढ़ियाँ बनी होती थीं।
घर पर यह करके देखें
आज किसी को उस काम के लिए धन्यवाद कहो जो उन्होंने बहुत पहले किया था।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
मुसाफिर ने किसे बचाया?
जवाब: तीन जानवर और एक सुनार
झूठी कहानी किसने कही?
जवाब: सुनार ने
इसकी सीख क्या है?
जवाब: मदद करने वालों का एहसान मानो
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