बोलने वाली गुफा
एक भूखे शेर को खाली गुफा मिली और उसने तय किया कि अंदर बैठकर उसके मालिक का इंतज़ार करेगा।
थोड़ी देर बाद एक सियार घर लौटा और उसने देखा कि बड़े पंजों के निशान अंदर जा रहे हैं, बाहर आते हुए एक भी नहीं।
वह दरवाज़े पर रुका और उसने एक चतुर तरकीब सोची।
उसने पुकारा, "अरे गुफा! तुम तो हमेशा मेरे लौटने पर नमस्ते कहती हो। आज भूल गईं क्या?"
अंदर बैठे शेर को लगा कि जवाब देना चाहिए, और वह बोल पड़ा, "नमस्ते!"
सियार हँसता हुआ भाग गया, क्योंकि गुफाएँ तो बोलती ही नहीं।
शांत दिमाग एक अच्छे सवाल से सच पता कर लेता है।
चतुराईक्या आप जानते हैं?
लोमड़ियों और सियारों की माँद में अक्सर कई रास्ते होते हैं, खतरे के लिए।
घर पर यह करके देखें
जब कुछ अजीब लगे, तो आगे बढ़ने से पहले एक सोचा-समझा सवाल पूछो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
गुफा के अंदर कौन इंतज़ार कर रहा था?
जवाब: एक शेर
सियार को कैसे पता चला?
जवाब: उसने गुफा से नमस्ते कहने को कहा
इसकी सीख क्या है?
जवाब: अच्छा सवाल सच निकाल लेता है
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