भरत अपने भाई को ढूँढने चले
भरत को राम की बहुत, बहुत याद आती थी। इसलिए उन्होंने तय किया कि वे उन्हें ढूँढेंगे।
बहुत सारे लोग साथ लेकर भरत गहरे जंगल में चल पड़े। पहाड़ों और नदियों को पार करते हुए वे उन्हें ढूँढते रहे।
उनके पैर थक गए, पर उनका प्यार भरा दिल चलता रहा। "मुझे अपने भाई से मिलना ही है," वे कहते।
आख़िरकार उन्हें राम की छोटी-सी कुटिया मिल गई। भरत दौड़े और राम को कसकर गले लगा लिया, खुशी के आँसू बहने लगे।
प्यार ही भरत को पूरे जंगल के पार उनके प्यारे भाई तक ले आया।
प्यार हमें ताक़त देता है कि हम अपनों के लिए दूर तक चल सकें।
प्यारक्या आप जानते हैं?
भरत राम की माताओं और पूरे दरबार को भी उनसे मिलवाने साथ ले गए थे।
घर पर यह करके देखें
जिस अपने की तुम्हें याद आती है, उसके लिए एक प्यार वाला काम करो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
भरत किसे ढूँढना चाहते थे?
जवाब: राम को
उन्होंने कहाँ ढूँढा?
जवाब: गहरे जंगल में
राम को पाकर भरत ने क्या किया?
जवाब: खुशी से गले लगाया
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