जुलाहे के दो रास्ते
एक जुलाहे को रास्ते में दो देवता मिले। बोले, "चुनो। अमीर और कंजूस बनो, या गरीब और उदार।"
उसने अपने गाँव के उस अमीर के बारे में सोचा जिसने कभी एक दाना नहीं बाँटा।
उसके यहाँ कोई नहीं आता था। कोई पास नहीं बैठता था। घर भरा था और दिन खाली।
फिर उसने उस गरीब के बारे में सोचा जो अपना पतला सा शोरबा भी सबसे बाँट देता था।
उसका बर्तन छोटा था, पर घर हमेशा हँसी से भरा रहता था।
जुलाहे ने कहा, "मुझे दूसरा जीवन दो," और उसे कभी अफसोस नहीं हुआ।
दोस्तों से भरा घर चीज़ों से भरे घर से ज़्यादा अमीर होता है।
उदारताक्या आप जानते हैं?
"पंचतंत्र" का मतलब है पाँच ग्रंथ, यानी समझदारी के पाँच रास्ते।
घर पर यह करके देखें
आज बिना कहे अपनी कोई एक चीज़ किसी के साथ बाँटो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
दोनों रास्ते क्या थे?
जवाब: अमीर-कंजूस, या गरीब-उदार
जुलाहे ने क्या चुना?
जवाब: गरीब और उदार बनना
इसकी सीख क्या है?
जवाब: दोस्त चीज़ों से ज़्यादा कीमती हैं
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