तीन मछलियाँ
एक शांत तालाब में तीन मछलियाँ रहती थीं। उनके नाम थे दूरदर्शी, हाज़िरजवाब और आलसी।
एक शाम कुछ मछुआरे वहाँ से गुज़रे। उन्होंने कहा, "कल हम जाल लेकर आएँगे।"
दूरदर्शी ने यह सुन लिया। उसने कहा, "आज रात ही निकल चलें," और वह तुरंत नदी की ओर तैर गई।
हाज़िरजवाब ने इंतज़ार किया। बोली, "मुसीबत आएगी तो कुछ सोच लूँगी।"
आलसी ने जम्हाई ली। बोली, "यहाँ कभी कुछ नहीं होता," और सो गई।
जाल आ गए। हाज़िरजवाब मरी जैसी तैरती रही और उसे फेंक दिया गया, पर आलसी सोते-सोते ही पकड़ी गई।
पहले से सोच लेना सबसे अच्छा है। मुसीबत का इंतज़ार करना कोई योजना नहीं।
पहले से सोचनाक्या आप जानते हैं?
कुछ मछलियाँ सचमुच मरने का नाटक करती हैं। इसे "थैनेटोसिस" कहते हैं।
घर पर यह करके देखें
अपना बस्ता कल सुबह की जगह आज रात ही तैयार कर लो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
तालाब तुरंत किसने छोड़ा?
जवाब: दूरदर्शी ने
हाज़िरजवाब कैसे बची?
जवाब: वह मरी मछली जैसी तैरती रही
इसकी सीख क्या है?
जवाब: मुसीबत आने से पहले योजना बनाओ
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