सोना देने वाला साँप
एक किसान को अपने खेत में एक साँप मिला और वह रोज़ उसके लिए दूध का कटोरा रखने लगा।
हर सुबह किसान को खाली कटोरे के पास एक सोने का सिक्का मिलता।
उसका जीवन आराम से चलने लगा और वह साँप को प्यार से धन्यवाद देता।
पर उसका बेटा बोला, "उस बिल में तो सोने का पूरा ढेर होगा। चलो सब निकाल लें।"
उसने साँप के घर पर वार किया, और उसके बाद सिक्के हमेशा के लिए बंद हो गए।
किसान ने आह भरी। रोज़ थोड़ा-थोड़ा मिलना ही काफी से ज़्यादा था।
एक साथ सब कुछ चाहने से जो थोड़ा है वह भी चला जाता है।
संतोषक्या आप जानते हैं?
साँप असल में दूध ठीक से पी ही नहीं सकते। पुरानी कहानियों में इसका मतलब सिर्फ आदर का तोहफा था।
घर पर यह करके देखें
अपनी तीन ऐसी चीज़ें गिनो जो पहले से हैं और तुम्हें खुश करती हैं।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
किसान साँप के लिए क्या रखता था?
जवाब: दूध का कटोरा
बेटा क्या चाहता था?
जवाब: एक साथ सारा सोना
इसकी सीख क्या है?
जवाब: लालच से जो है वह भी चला जाता है
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