टिटहरी और समुद्र
एक छोटी टिटहरी ने समुद्र के पास गरम रेत पर अपने अंडे दिए।
एक बड़ी लहर आई और अंडे बहा ले गई। चिड़िया बहुत दुखी हुई, पर उसने हार नहीं मानी।
उसने कहा, "मैं पूरा समुद्र खाली कर दूँगी।" उसने चोंच में पानी की एक बूँद उठाई और रेत पर गिरा दी।
वह बार-बार जाती रही, एक-एक बूँद करके। बाकी पक्षी भी उसकी मदद को आ गए।
आखिर पक्षियों का महान राजा भी आया और उसने समुद्र से दया करने को कहा।
समुद्र को शर्म आई, और उसने छोटी चिड़िया के अंडे लौटा दिए।
काम कितना भी बड़ा लगे, कभी हार मत मानो।
हार मत मानोक्या आप जानते हैं?
असली टिटहरी खुले रेत पर ही घोंसला बनाती है, टहनियाँ बिल्कुल नहीं लगाती।
घर पर यह करके देखें
जो काम तुम्हें कठिन लगता है, उसका थोड़ा सा हिस्सा आज कर लो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
समुद्र क्या ले गया?
जवाब: उसके अंडे
चिड़िया ने समुद्र कैसे खाली करना चाहा?
जवाब: एक-एक बूँद करके
इसकी सीख क्या है?
जवाब: कभी हार मत मानो
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