साधु का बदलता पालतू
एक दयालु साधु ने एक नन्ही चुहिया को बाज़ से बचाया और घर ले आए।
एक बिल्ली से वह डर गई, तो उन्होंने उसे बिल्ली बना दिया। फिर एक कुत्ते से वह डरी।
तो उन्होंने उसे कुत्ता बना दिया, और फिर जब बाघ पास आया, तो एक शानदार बाघ।
पर वह बाघ भी हर आवाज़ पर उछल पड़ता था, क्योंकि भीतर वह अब भी एक नन्ही चुहिया थी।
साधु ने प्यार से कहा, "बाहर बदलने से दिल नहीं बदलता।"
तो उन्होंने उसे वापस चुहिया बना दिया, और वह अपने छोटे से बिल में खुशी-खुशी रहने लगी।
दिखने का रूप बदलने से तुम भीतर से नहीं बदल जाते।
जो हो, वही रहोक्या आप जानते हैं?
यह कहानी हज़ार साल से भी पुरानी है और कई देशों में "साधु और चूहा" नाम से सुनाई जाती है।
घर पर यह करके देखें
अपनी एक ऐसी बात बताओ जो तुम्हें पसंद है और जिसका दिखने से कोई लेना-देना नहीं।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
साधु ने किसे बचाया?
जवाब: एक चुहिया को
बाघ बनकर भी वह कैसी थी?
जवाब: भीतर से अब भी डरी हुई
इसकी सीख क्या है?
जवाब: बाहर बदलने से दिल नहीं बदलता
इस कहानी को जीवंत बनाइए
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