साधु और नन्हा चूहा
एक साधु अपना खाना छत से ऊँचे लटके कटोरे में रखता था।
हर रात एक नन्हा चूहा उतनी ऊँचाई तक छलाँग लगाकर उसमें से कुछ ले जाता।
साधु हैरान था। इतना छोटा जीव इतनी ऊँची छलाँग कैसे लगा लेता है?
एक मेहमान ने कहा, "ज़रूर उसके पास अनाज का बड़ा भंडार होगा। भरा भंडार हिम्मत देता है।"
उन्होंने चूहे का छिपा ढेर ढूँढा और हटा दिया।
उस रात चूहा बिल्कुल छलाँग नहीं लगा पाया। मेहमान बोला, "बात टाँगों की कभी थी ही नहीं, बात हिम्मत की थी।"
हमारे भीतर जो होता है, वही तय करता है कि हम क्या कर सकते हैं।
दूसरों को समझनाक्या आप जानते हैं?
घर का चूहा अपनी ऊँचाई से कई गुना, करीब 30 सेंटीमीटर तक सीधे ऊपर कूद सकता है।
घर पर यह करके देखें
एक चीज़ सोचो जिसमें तुम पहले से बेहतर हुए हो। उसे ज़ोर से खुद को कहो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
साधु खाना कहाँ रखता था?
जवाब: ऊँचे लटके कटोरे में
चूहा इतनी ऊँची छलाँग क्यों लगा पाता था?
जवाब: उसके पास अनाज का छिपा भंडार था
इसकी सीख क्या है?
जवाब: हिम्मत बदल देती है कि हम क्या कर सकते हैं
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