जिसे जो मिलना था, वही मिला
दो दोस्त किस्मत आज़माने दूर देश गए। एक को सोना मिला, दूसरे को बहुत थोड़ा।
किस्मत वाला लालची हो गया और दोस्त का हिस्सा भी चाहने लगा।
उसने चालाकी की योजना बनाई, पर हर मोड़ पर योजना उल्टी पड़ती गई।
उसका सोना रास्ते में खो गया, उसकी गाड़ी टूट गई, और वह खाली हाथ घर लौटा।
फिर भी दूसरे दोस्त ने अपना थोड़ा सा खाना उसके साथ बाँट लिया।
समझदार लोग बोले, "जो देते हो वही मिलता है, और भलाई सोने से ज़्यादा कीमती है।"
जो तुम बाँटते हो, वही लौटकर तुम्हारे पास आता है।
संतोषक्या आप जानते हैं?
पंचतंत्र का फारसी में अनुवाद करीब 570 ईस्वी में हुआ, फिर अरबी, यूनानी और लैटिन में।
घर पर यह करके देखें
आज एक भला काम करो और किसी को बताओ मत।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
किस्मत वाला दोस्त क्या चाहता था?
जवाब: दोस्त का हिस्सा भी
उसके सोने का क्या हुआ?
जवाब: वह खो गया
इसकी सीख क्या है?
जवाब: जो देते हो वही लौटता है
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