बगुला और केकड़ा
एक बूढ़ा बगुला अब मछली नहीं पकड़ पाता था। इसलिए वह तालाब किनारे बैठकर बहुत उदास चेहरा बनाए रहता।
उसने मछलियों से कहा, "एक मछुआरा आ रहा है, यह तालाब खाली कर देगा। मैं तुम्हें बड़ी सुरक्षित झील में पहुँचा दूँगा।"
डरी हुई मछलियाँ मान गईं। बगुला एक-एक करके उन्हें ले जाता रहा, और एक-एक करके खाता रहा।
आखिर एक केकड़े ने भी चलने को कहा। बगुले ने उसे उठा लिया।
आसमान से केकड़े ने मछलियों की हड्डियों का ढेर देख लिया। वह सब समझ गया।
केकड़े ने अपने मज़बूत पंजों से कसकर पकड़े रखा, जब तक बगुले ने उसे पानी के पास सही-सलामत नहीं उतारा।
झूठ कुछ दिन चल सकता है, पर पकड़ा हमेशा जाता है।
सच्चाईक्या आप जानते हैं?
केकड़े का पंजा इतना मज़बूत होता है कि सोते हुए भी पकड़ बनाए रखता है।
घर पर यह करके देखें
आज कोई गलती हो जाए तो तुरंत सच बता दो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
बगुले ने मछलियों से क्या वादा किया?
जवाब: एक सुरक्षित झील
सच किसने जाना?
जवाब: केकड़े ने
इसकी सीख क्या है?
जवाब: झूठ पकड़ा जाता है
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