साँप की सवारी करने वाला मेंढक
एक बूढ़ा मेंढक राजा थक चुका था और अब अपने तालाब में उछल-कूद नहीं कर पाता था।
उसे एक चतुर साँप मिला और उसने कहा, "मुझे अपनी पीठ पर घुमाओ, मैं तुम्हें अपना राज दिखाऊँगा।"
साँप मान गया, और मेंढक शान से घूमता रहा ताकि उसकी सारी प्रजा देखे।
पर साँप भूखा था, और तालाब में हर दिन मेंढक कम होते गए।
आखिर राजा ने खाली पानी में इधर-उधर देखकर पूछा, "सब कहाँ गए?"
उसने खतरे को खुद अपने घर बुला लिया था, और अब उसे भगाना बहुत मुश्किल था।
किसे अपने घर बुला रहे हो, यह सोच-समझकर तय करो।
सोची-समझी योजनाक्या आप जानते हैं?
मेंढक मुँह से नहीं, अपनी त्वचा से पानी पीते हैं।
घर पर यह करके देखें
किसी नए को घर में आने देने से पहले किसी बड़े से पूछो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
मेंढक राजा किसकी सवारी करता था?
जवाब: एक साँप की
मेंढकों का क्या हुआ?
जवाब: वे कम से कम होते गए
इसकी सीख क्या है?
जवाब: सोचो किसे घर बुला रहे हो
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