कौए और उल्लू
एक बड़े बरगद के पेड़ पर कौओं का परिवार रहता था। पास की चट्टानी गुफा में उल्लू रहते थे।
कौओं को दिन में साफ दिखता था। उल्लुओं को रात में। दोनों एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करते थे।
बहुत पहले कोई झगड़ा हुआ था, और अब किसी को ठीक से याद भी नहीं था कि क्यों।
फिर भी वे साल दर साल बिना किसी वजह के एक-दूसरे को डराते रहे।
एक समझदार बूढ़े कौए ने सिर हिलाया। बोला, "जिस लड़ाई की शुरुआत किसी को याद ही नहीं, वह सबसे बेवकूफी वाली लड़ाई है।"
इसे खत्म करने के लिए किसी एक चतुर पक्षी की ज़रूरत थी।
बहुत से झगड़े तब तक चलते रहते हैं जब उनकी वजह सब भूल चुके होते हैं।
शांतिक्या आप जानते हैं?
उल्लू अपना सिर लगभग पूरा घुमा सकता है, करीब 270 डिग्री तक।
घर पर यह करके देखें
अगर किसी से नाराज़ हो, तो याद करो कि ठीक-ठीक क्यों। हो सकता है बात खत्म हो चुकी हो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
कौए कहाँ रहते थे?
जवाब: एक बरगद के पेड़ पर
वे लड़ क्यों रहे थे?
जवाब: किसी को याद नहीं था
इसकी सीख क्या है?
जवाब: पुराने झगड़ों की अक्सर कोई वजह नहीं बचती
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