दोस्ती जीतने वाला कौआ
एक कौए ने देखा कि चतुर चूहे ने कबूतरों को जाल से छुड़ाया, और उसका मन उससे दोस्ती करने का हुआ।
कौए ने चूहे के बिल पर पुकारा, "बाहर आओ और मुझसे बात करो।"
चूहा बोला, "तुम तो मेरे जैसे जीव खाते हो। मैं तुम पर भरोसा क्यों करूँ?"
कौआ गया नहीं। वह रोज़ आता रहा, खाना लाता रहा, और एक बार भी धोखा नहीं दिया।
धीरे-धीरे चूहे ने झाँका, फिर पास बैठा, फिर घंटों बातें कीं।
कौए ने सीखा कि भरोसा छीना नहीं जाता, कमाया जाता है।
भरोसा धीरे-धीरे बनता है, बार-बार अपनी बात निभाने से।
धीरजक्या आप जानते हैं?
कौए पहेलियाँ सुलझा लेते हैं और छोटी टहनियों को औज़ार की तरह भी इस्तेमाल करते हैं।
घर पर यह करके देखें
आज किया हुआ एक छोटा वादा ठीक वैसे ही निभाओ जैसे कहा था।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
कौआ किससे दोस्ती करना चाहता था?
जवाब: एक चूहे से
कौए ने भरोसा कैसे जीता?
जवाब: रोज़ प्यार से आकर
इसकी सीख क्या है?
जवाब: भरोसा धीरे-धीरे कमाया जाता है
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