सही-सोच और गलत-सोच
दो दोस्त, सही-सोच और गलत-सोच, को साथ में सोने के सिक्कों की एक थैली मिली।
गलत-सोच ने कहा, "इसे इस पेड़ के नीचे गाड़ देते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर थोड़ा-थोड़ा लेंगे।"
पर उसी रात गलत-सोच चुपके से आया और पूरी थैली उठा ले गया।
बाद में उसने सबसे कहा कि चोर सही-सोच है। गाँव के न्यायाधीश ने सबूत माँगा।
गलत-सोच बोला, "पेड़ खुद गवाही देगा," और उसने अपने पिता को खोखले तने में छिपा दिया।
पर न्यायाधीश को शक हुआ, उन्होंने अंदर झाँका और उन्हें पकड़ लिया। सच सामने आया और सोना ईमानदार दोस्त को मिल गया।
एक झूठ को टिकाने के लिए और झूठ चाहिए, और आखिर पूरा ढेर गिर जाता है।
ईमानदारीक्या आप जानते हैं?
पुराने भारतीय गाँवों में झगड़े "पंचायत" सुलझाती थी, यानी पाँच भरोसेमंद लोगों की सभा।
घर पर यह करके देखें
आज कुछ टूट जाए तो सबसे पहले खुद बता दो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
दोनों दोस्तों को क्या मिला?
जवाब: सोने के सिक्कों की थैली
पेड़ में कौन छिपा था?
जवाब: गलत-सोच के पिता
इसकी सीख क्या है?
जवाब: आखिर में झूठ बिखर जाता है
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