शांत नदी के पार
नाविक गुह ने राम, सीता और लक्ष्मण को चौड़ी नदी के पार पहुँचाया।
छोटी नाव शांत पानी पर धीरे-धीरे चलती रही। मछलियाँ छपाक-छपाक कर रही थीं। सूरज की धूप नरम थी।
जब वे दूसरे किनारे पहुँचे, तो राम गुह की ओर मुड़े। "धन्यवाद, मेरे प्यारे दोस्त," उन्होंने कहा। "तुमने पूरे दिल से हमारी मदद की।"
राम के पास देने के लिए सोना नहीं था, इसलिए उन्होंने गुह को उससे भी अच्छी चीज़ दी — एक प्यारी झप्पी और एक आभार भरी मुस्कान।
राम के इस मीठे धन्यवाद से गुह को लगा जैसे वह राजा से भी ज़्यादा अमीर हो गया हो।
जो तुम्हारी मदद करे, उसे हमेशा धन्यवाद कहो। आभार एक सुंदर तोहफ़ा है।
आभारक्या आप जानते हैं?
बहुत पहले नदियाँ ही सफ़र का मुख्य रास्ता थीं, इसलिए नाविक बहुत बड़े मददगार माने जाते थे।
घर पर यह करके देखें
आज जिसने तुम्हें कहीं पहुँचने में मदद की, उसे धन्यवाद कहो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
वे नदी कैसे पार कर पाए?
जवाब: नाव से
राम ने गुह को क्या दिया?
जवाब: झप्पी और धन्यवाद
गुह को कैसा लगा?
जवाब: राजा से भी अमीर
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