सियार और युद्ध का ढोल
एक भूखा सियार सुनसान रणभूमि में जा पहुँचा। अचानक उसे बहुत तेज़ आवाज़ सुनाई दी। ढम! ढम!
उसकी टाँगें काँपने लगीं। उसने सोचा, "यहाँ कोई बड़ा जानवर है। मुझे भाग जाना चाहिए।"
फिर वह रुका। उसने हिम्मत करके कहा, "ठहरो। पहले देख तो लूँ।"
वह धीरे-धीरे पास गया और देखा कि वहाँ बस एक पुराना ढोल पड़ा है। हवा से एक टहनी उससे टकरा रही थी।
सियार खिलखिलाकर हँस पड़ा। इतनी डरावनी आवाज़ असल में कुछ भी नहीं थी।
भागने से पहले देख लो। बहुत सी डरावनी आवाज़ें असल में कुछ नहीं होतीं।
हिम्मतक्या आप जानते हैं?
पुराने भारतीय सेनाएँ "दुंदुभि" नाम के बड़े ढोल से संदेश भेजती थीं।
घर पर यह करके देखें
अगली बार कोई आवाज़ डराए तो किसी बड़े का हाथ पकड़कर देखने जाओ कि वह क्या है।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
तेज़ आवाज़ किससे आ रही थी?
जवाब: ढोल से टकराती टहनी से
सियार ने पहले क्या महसूस किया?
जवाब: उसे डर लगा
उसने क्या सीखा?
जवाब: डरने से पहले पता कर लो
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