बिल्ली का फैसला
एक तीतर घूमने गया, और उसके पीछे एक खरगोश उसके घोंसले में आ बसा।
तीतर लौटा तो झगड़ा हो गया। "यह खाली था!" "यह मेरा था!"
खरगोश बोला, "चलो नदी किनारे वाली धर्मात्मा बिल्ली से पूछते हैं। वह दिन भर पूजा करती रहती है।"
बिल्ली आँखें आधी बंद किए बिल्कुल शांत बैठी थी और बहुत मीठी आवाज़ में बोली।
उसने धीरे से कहा, "मैं बूढ़ी हूँ और कम सुनती हूँ। प्यारे दोस्तो, पास आकर फिर से बताओ।"
पेड़ पर बैठे समझदार बूढ़े पक्षियों ने चेतावनी दी, और दोनों जानवर ऐन वक्त पर भाग निकले।
सिर्फ मीठा बोलने से कोई अनजान तुम्हारे झगड़े का फैसला करने लायक नहीं हो जाता।
भरोसा सोच-समझकरक्या आप जानते हैं?
बिल्ली इतनी ऊँची आवाज़ें सुन लेती है जो इंसान के कानों की पकड़ से बाहर हैं।
घर पर यह करके देखें
दोस्त से झगड़ा हो तो किसी ऐसे बड़े से मदद माँगो जिस पर दोनों को भरोसा हो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
तीतर और खरगोश किस बात पर झगड़ रहे थे?
जवाब: एक घोंसले पर
उन्होंने फैसला किससे कराना चाहा?
जवाब: एक बिल्ली से
इसकी सीख क्या है?
जवाब: भरोसा सोच-समझकर करो
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