नीला सियार
एक सियार कुत्तों से भागते-भागते नीले रंग के बड़े टब में जा गिरा।
बाहर निकला तो नाक से पूँछ तक चमकीला नीला था। ऐसा रंग किसी जानवर ने कभी नहीं देखा था।
उसने कहा, "मैं आसमान से भेजा गया राजा हूँ!" सब जानवरों ने सिर झुकाया। वह बढ़िया खाना खाता और ऊँची चट्टान पर बैठता।
एक शाम बाकी सियार चाँद देखकर हुआँ-हुआँ करने लगे। नीला सियार भी खुद को रोक न सका और हुआँ-हुआँ कर बैठा।
वह आवाज़ सब पहचान गए। सब चिल्लाए, "यह तो सियार ही है!"
वह भाग गया, और फिर कभी किसी और का रूप नहीं बनाया।
किसी और का रूप बनाकर ज़्यादा दिन नहीं चलता। जो हो, वही रहो।
सच्चाईक्या आप जानते हैं?
भारत का नील रंग इतना कीमती था कि व्यापारी उसे "नीला सोना" कहते थे।
घर पर यह करके देखें
अपने बारे में एक सच्ची बात किसी को बताओ जो तुम्हें खुद पसंद है।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
सियार नीला कैसे हुआ?
जवाब: वह रंग के टब में गिर गया
उसकी पोल किससे खुली?
जवाब: उसकी हुआँ-हुआँ से
इसकी सीख क्या है?
जवाब: जो हो, वही रहो
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