सीता और नन्ही चिड़िया
एक सुबह सीता को ज़मीन पर एक नन्ही चिड़िया मिली, जिसका पंख चोटिल था।
उनका दिल प्यार से भर आया। उन्होंने बहुत धीरे से उसे अपने हाथों में उठा लिया।
उन्होंने पत्तों का एक गरम-सा छोटा घोंसला बनाया। चिड़िया को पानी और नरम बेर दिए। हर दिन उससे प्यार से बातें कीं।
जल्दी ही नन्ही चिड़िया का पंख फिर से मज़बूत हो गया। वह फुदकी, फिर पंख फड़फड़ाए, और नीले आसमान में उड़ गई!
उसने एक बार गोल चक्कर लगाया, मानो धन्यवाद कह रही हो, और सीता ने खुशी से मुस्कुराकर हाथ हिलाया।
छोटों और कमज़ोरों का ख़याल रखना एक प्यार भरे दिल की पहचान है।
दयाक्या आप जानते हैं?
रामायण में सीता को हर जीव के लिए उनके कोमल प्यार के कारण बहुत चाहा जाता है।
घर पर यह करके देखें
आज कोई छोटा जीव या कीड़ा दिखे तो उसके साथ नरमी से पेश आओ।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
सीता को क्या मिला?
जवाब: चोटिल चिड़िया
उन्होंने उसकी मदद कैसे की?
जवाब: घोंसला बनाकर ख़याल रखा
ठीक होने पर चिड़िया ने क्या किया?
जवाब: खुशी से उड़ गई
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