दयालु नाविक गुह
एक चौड़ी नदी के किनारे गुह नाम का एक नाविक रहता था। वह न राजकुमार था, न अमीर आदमी, बस एक सीधा-सादा दयालु मल्लाह था।
जब राम वहाँ पहुँचे, तो गुह ने उनका गरमजोशी से स्वागत किया। "यहाँ आराम कीजिए, मित्र," उसने कहा।
राम ने गुह को भाई की तरह गले लगा लिया। उन्हें इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ा कि गुह अमीर या राजा नहीं था। उन्होंने तो बस गुह का अच्छा और दयालु दिल देखा।
"तुम मेरे मित्र हो," राम ने प्यार से कहा। गुह की आँखें खुशी के आँसुओं से भर गईं।
राम ने दिखा दिया कि सच्ची दोस्ती नहीं देखती कि कौन अमीर है और कौन गरीब।
सच्ची दोस्ती दिल देखती है, यह नहीं कि कोई कितना अमीर या बड़ा है।
दोस्तीक्या आप जानते हैं?
गुह जंगल में रहने वाले एक कबीले के मुखिया थे और राम के प्यारे दोस्तों में से एक बन गए।
घर पर यह करके देखें
किसी ऐसे इंसान से दोस्ती से पेश आओ जो तुमसे अलग है।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
गुह क्या काम करता था?
जवाब: नाव चलाता था
राम ने गुह के साथ कैसा बर्ताव किया?
जवाब: भाई जैसा
सच्ची दोस्ती क्या देखती है?
जवाब: दिल
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