भरत ने राजगद्दी को मना कर दिया
उधर अयोध्या में लोग चाहते थे कि अब भरत नए राजा बनें।
पर भरत ने साफ़-साफ़ मना कर दिया। "नहीं," उन्होंने कहा। "यह राजगद्दी मेरे भाई राम की है, मेरी नहीं। इसे लेना न सही होगा, न सच्चाई।"
भरत राम से बहुत प्यार करते थे। उन्हें ऐसा मुकुट नहीं चाहिए था जो उनका था ही नहीं।
"मैं उस गद्दी पर नहीं बैठूँगा," उन्होंने वादा किया। "वह जगह राम की है।"
भरत राजा बन सकते थे, फिर भी उन्होंने सच्चा और ईमानदार रहना चुना।
ताक़तवर बनने से ज़्यादा ज़रूरी है सच्चा और न्यायी बनना।
सच्चाईक्या आप जानते हैं?
भरत का राजगद्दी को मना करना इस कहानी के सबसे बड़े प्यार भरे कामों में से एक है।
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अगर कोई चीज़ सच में तुम्हारी नहीं है, तो सच बोलो और उसे लौटा दो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
लोग भरत से क्या चाहते थे?
जवाब: राजा बनें
भरत ने क्या कहा?
जवाब: "नहीं, गद्दी राम की है"
भरत ने मना क्यों किया?
जवाब: वे सच्चे और न्यायी रहना चाहते थे
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