ऋषि का प्यार भरा स्वागत
जंगल के भीतर भरद्वाज नाम के एक बुज़ुर्ग और समझदार ऋषि रहते थे।
राम वहाँ पहुँचे तो उन्होंने झुककर प्रणाम किया। "नमस्ते, गुरुजी," उन्होंने बड़े आदर से कहा।
दयालु ऋषि मुस्कुराए। "स्वागत है, प्यारे बच्चों। तुम यहाँ आराम कर सकते हो।" उन्होंने उन्हें फल, ठंडा पानी और सोने के लिए नरम जगह दी।
राम ने हाथ जोड़कर धन्यवाद कहा और ऋषि की अच्छी-अच्छी बातें ध्यान से सुनीं।
राम ने आदर दिया, तो बदले में उन्हें प्यार, समझदारी और खुशी भरा स्वागत मिला।
जब हम बड़ों का आदर करते हैं, तो वे हमें अपना प्यार और अपनी समझ देते हैं।
बड़ों का आदरक्या आप जानते हैं?
"नमस्ते" एक आदर वाला अभिवादन है, जिसका मतलब है "मैं आपका सम्मान करता हूँ।"
घर पर यह करके देखें
आज किसी बड़े को प्यार से "नमस्ते" कहो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
जंगल में राम का स्वागत किसने किया?
जवाब: ऋषि भरद्वाज
राम ने उन्हें कैसे प्रणाम किया?
जवाब: झुककर आदर से
"नमस्ते" का मतलब क्या है?
जवाब: मैं आपका सम्मान करता हूँ
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