तालाब छोड़ने वाला कछुआ
एक कछुए ने खरगोशों को मैदान में दौड़ लगाते देखा और सोचा काश वह भी ऐसे दौड़ पाता।
उसने अपना ठंडा तालाब छोड़ा और गरम सूखी ज़मीन पर दौड़ने की कोशिश की।
वह धीमा था, थक गया, और पूरी दोपहर सूरज ने उसकी पीठ जला दी।
एक खरगोश रुका और प्यार से बोला, "पता है, मैं तो तैर ही नहीं सकता।"
कछुए ने यह पहले कभी सोचा ही नहीं था।
वह अपने पानी में लौट गया, जहाँ वह परछाईं की तरह तैरता था, और वह बहुत खुश हुआ।
वह जगह ढूँढो जहाँ तुम्हारा अपना हुनर सबसे अच्छा चलता है।
खुद को जाननाक्या आप जानते हैं?
कुछ कछुए साँस रोककर घंटों पानी के भीतर रह सकते हैं।
घर पर यह करके देखें
अपनी एक ऐसी बात पहचानो जो तुम आसानी से कर लेते हो और दूसरों को मुश्किल लगती है।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
कछुआ क्या चाहता था?
जवाब: खरगोश की तरह दौड़ना
खरगोश ने क्या कहा कि वह नहीं कर सकता?
जवाब: तैरना
इसकी सीख क्या है?
जवाब: वह जगह ढूँढो जहाँ तुम्हारा हुनर चले
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