गिलहरी और तूफान
पूरे गरम मौसम एक गिलहरी एक खोखली डाल में मेवे भरती रही।
बाकी जानवर हँसते। कहते, "आओ खेलो। धूप तो हमेशा रहेगी।"
गिलहरी कहती, "रोज़ थोड़ा-थोड़ा," और अपना काम करती रहती।
फिर भारी बारिश आई, और कई दिनों तक बिना रुके बरसती रही।
जंगल की ज़मीन कीचड़ बन गई और कहीं कुछ खाने को नहीं मिल रहा था।
गिलहरी ने अपना भंडार खोला और सबके साथ बाँटा, और उसके बाद कोई उस पर नहीं हँसा।
रोज़ थोड़ा-थोड़ा किया काम ज़रूरत के वक्त बहुत बड़ा बन जाता है।
तैयारीक्या आप जानते हैं?
गिलहरियाँ हर साल हज़ारों मेवे छिपाती हैं और ज़्यादातर जगहें याद भी रखती हैं।
घर पर यह करके देखें
कल के काम का थोड़ा सा हिस्सा आज कर लो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
गिलहरी क्या इकट्ठा करती थी?
जवाब: मेवे
बाकी क्या कहते थे?
जवाब: छोड़ो, आकर खेलो
इसकी सीख क्या है?
जवाब: रोज़ थोड़ा-थोड़ा जुड़ता जाता है
इस कहानी को जीवंत बनाइए
Superkids ऐप में आपका बच्चा यही कहानी तस्वीरों के साथ पढ़ता है, सुनता भी है, सवालों का जवाब खेल-खेल में देता है, और हर पूरी कहानी पर सितारे कमाता है।
मुफ़्त शुरू करेंकार्ड की ज़रूरत नहीं।