बंदर जो लौटा नहीं
मगरमच्छ से बचने के बाद बंदर अपने फल वाले पेड़ पर सही-सलामत बैठा था।
अगले दिन मगरमच्छ लौटा और मीठे से बोला, "आओ दोस्त, फिर से चलते हैं।"
बंदर ने नीचे देखा और हँस पड़ा। बोला, "एक बार काफी था।"
उसने जोड़ा, "मैंने तुम्हें माफ कर दिया, पर मैं दूसरी बार तुम्हारी पीठ पर नहीं चढ़ूँगा।"
मगरमच्छ तैरकर चला गया, और बंदर अपने मीठे बैंगनी फल खाता रहा।
उसने सीखा था कि किसी को माफ करने का मतलब यह नहीं कि उस पर फिर से अपनी जान भरोसे रख दो।
तुम किसी को माफ भी कर सकते हो और सावधान भी रह सकते हो।
समझदारीक्या आप जानते हैं?
इसी अंत की वजह से चौथे तंत्र का नाम लब्धप्रणाशम् है: पाया हुआ खो देना।
घर पर यह करके देखें
कोई माफी माँगे तो प्यार से मान लो, और समझदारी भी बनाए रखो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
मगरमच्छ ने क्या माँगा?
जवाब: एक और सैर
बंदर ने क्या कहा?
जवाब: एक बार काफी था
इसकी सीख क्या है?
जवाब: माफ करो, पर सावधान रहो
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