मछुआरे के तीन जाल
एक मछुआरे के पास तीन जाल थे, और वह हर शाम सोने से पहले उन्हें सिलता था।
एक रात वह थका हुआ था और उसने एक छोटा सा छेद बिना सिले छोड़ दिया।
उसने खुद से कहा, "बस एक उँगली भर तो है। इसमें से क्या निकल जाएगा?"
सुबह उसने जाल डाला और एक शानदार शिकार खींच लिया।
पर वह छेद पूरी रात पानी में बड़ा होता गया, और किनारे तक पहुँचते-पहुँचते जाल लगभग खाली था।
उस शाम उसने कितना भी थका होने पर हर जाल सिला।
छोटे-छोटे काम टालते रहो तो वे बाद में बड़ी मुसीबत बन जाते हैं।
काम ठीक से करनाक्या आप जानते हैं?
भारत में मछुआरे हज़ारों सालों से हाथ की गाँठों वाले जाल इस्तेमाल करते आए हैं।
घर पर यह करके देखें
आज कोई छोटी टूटी चीज़ टालने की जगह ठीक कर दो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
उसके पास कितने जाल थे?
जवाब: तीन
उसने क्या बिना सिले छोड़ा?
जवाब: एक छोटा छेद
इसकी सीख क्या है?
जवाब: छोटे काम टालो तो बड़े हो जाते हैं
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