पंख चाहने वाली बिल्ली
एक बिल्ली दिन भर पक्षियों को देखती और पूरे दिल से पंख माँगती।
उसने अपने अगले पैरों पर चौड़े पत्ते बाँधे और बगीचे की दीवार पर चढ़ गई।
वह नीचे कूदी, और नीचे ही गिरती चली गई, सीधे नरम फूलों की क्यारी में।
एक बूढ़ी गौरैया उसके पास उतरी। बोली, "तुम उड़ नहीं सकतीं, पर तुम चढ़ सकती हो, और मैं नहीं चढ़ सकती।"
बिल्ली ने उस ऊँचे आम के पेड़ की ओर देखा जिस पर वह सौ बार चढ़ चुकी थी।
उस शाम वह बिल्कुल ऊपर तक चढ़ी और सूरज डूबते देखा, किसी भी गौरैया की हिम्मत से भी ऊँचे।
किसी और का हुनर माँगने की जगह अपना हुनर इस्तेमाल करो।
जो हो, वही रहोक्या आप जानते हैं?
बिल्लियाँ अपनी लंबाई से छह गुना तक की छलाँग एक बार में लगा सकती हैं।
घर पर यह करके देखें
अपनी एक ऐसी बात बताओ जो तुम कर सकते हो और तुम्हारा दोस्त नहीं, और उस पर खुश हो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
बिल्ली को क्या चाहिए था?
जवाब: पंख
बिल्ली क्या कर सकती थी जो गौरैया नहीं?
जवाब: चढ़ना
इसकी सीख क्या है?
जवाब: अपना हुनर इस्तेमाल करो
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