दया से मिली नई ज़िंदगी
रास्ते में राम ने एक बड़ा सलेटी पत्थर देखा, जो लेटी हुई एक स्त्री जैसा दिखता था।
ऋषि ने बताया, "यह अहल्या हैं। बहुत समय पहले उनसे एक गलती हो गई थी और तब से वे पत्थर बनकर, उदास होकर, बहुत-बहुत लंबे समय से इंतज़ार कर रही हैं।"
राम ने उन्हें गलत नहीं ठहराया। उनके मन में सिर्फ़ दया थी। उन्होंने धीरे से अपने पैर से पत्थर को छू दिया।
धीरे-धीरे पत्थर फिर से स्त्री बन गया! अहल्या ने आँखें खोलीं और खड़ी हो गईं। आख़िरकार उन्हें माफ़ी मिल गई थी।
"धन्यवाद," उन्होंने धीरे से कहा, और उनकी आँखों में खुशी के आँसू थे। "आपने दया से मुझे आज़ाद कर दिया।"
गलती सबसे होती है। माफ़ी उन्हें फिर से शुरुआत करने में मदद करती है।
माफ़ीक्या आप जानते हैं?
यह प्यारा पल रामायण की सबसे पसंद की जाने वाली माफ़ी की कहानियों में से एक है।
घर पर यह करके देखें
जो दोस्त माफ़ी माँगे, उसे माफ़ कर दो और नई शुरुआत करने दो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
पत्थर कैसा दिखता था?
जवाब: लेटी हुई स्त्री जैसा
उस स्त्री का नाम क्या था?
जवाब: अहल्या
उन्हें किसने आज़ाद किया?
जवाब: दया और माफ़ी ने
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