लकड़हारे का सच्चा जवाब
एक लकड़हारे की पुरानी लोहे की कुल्हाड़ी गहरी नदी में गिर गई, और वह बैठकर रोने लगा।
एक जलदेवी प्रकट हुईं, हाथ में चमकती सोने की कुल्हाड़ी लिए। बोलीं, "क्या यह तुम्हारी है?"
लकड़हारा बोला, "नहीं। मेरी तो पुरानी और साधारण थी।"
देवी चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर आईं, और उसने फिर सिर हिला दिया।
फिर वे उसकी अपनी घिसी हुई लोहे की कुल्हाड़ी लाईं, और उसका चेहरा तुरंत खिल उठा।
देवी बोलीं, "तुम्हारी ईमानदारी के लिए तीनों ले जाओ," और लकड़हारा गाता हुआ घर लौटा।
ईमानदारी सोने से ज़्यादा कीमती है, और अक्सर सोना भी दिला देती है।
ईमानदारीक्या आप जानते हैं?
यह कहानी भारत, यूनान और दर्जनों और जगहों पर सुनाई जाती है, और अंत हमेशा यही होता है।
घर पर यह करके देखें
अगर तुम्हें कोई ऐसी चीज़ मिले जो तुम्हारी नहीं है, तो उसे जमा करा दो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
लकड़हारे की क्या खो गई?
जवाब: उसकी लोहे की कुल्हाड़ी
उसने किस कुल्हाड़ी को अपनी बताया?
जवाब: पुरानी लोहे वाली
इसकी सीख क्या है?
जवाब: ईमानदारी सोने से कीमती है
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