दो व्यापारी
दो व्यापारी एक ही दुकान चलाते थे। एक ईमानदारी से तौलता, दूसरा तराजू पर अंगूठा रखे रहता।
पहले-पहल बेईमान ज़्यादा कमाने लगा और अपने सावधान साथी पर हँसता रहा।
पर बात धीरे-धीरे फैल गई, जैसे छोटे कस्बे में हमेशा फैलती है।
जल्दी ही लोग उनकी दुकान के आगे से निकलकर कहीं और से सामान लेने लगे।
ईमानदार व्यापारी ने अपनी अलग छोटी दुकान खोली, और उसके पुराने ग्राहक वहीं चले आए।
उसने जाना कि अच्छा नाम बनने में सालों लगते हैं और बिगड़ने में एक पल।
तुम्हारा अच्छा नाम उस हर चीज़ से कीमती है जो तुम बेच सकते हो।
ईमानदारीक्या आप जानते हैं?
पुराने भारतीय व्यापारी संघों में सही नाप-तौल के कड़े नियम होते थे।
घर पर यह करके देखें
अगर गलती से ज़्यादा पैसे वापस मिलें, तो ठीक-ठीक लौटा दो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
बेईमान व्यापारी क्या करता था?
जवाब: तराजू पर अंगूठा रखता था
उनकी दुकान का क्या हुआ?
जवाब: ग्राहक आना बंद हो गए
इसकी सीख क्या है?
जवाब: अच्छा नाम सबसे कीमती है
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