दो मछलियाँ और एक मेंढक
सौ-बुद्धि और हज़ार-बुद्धि नाम की दो मछलियाँ एक तालाब में एक साधारण मेंढक के साथ रहती थीं।
एक शाम मेंढक ने मछुआरों को कहते सुना कि वे सुबह आएँगे।
मेंढक बोला, "आज रात ही निकल चलें।" मछलियाँ उस पर हँस पड़ीं।
वे बोलीं, "हमारे पास सौ तरकीबें और हज़ार तरकीबें हैं। हम सँभाल लेंगी।"
मेंढक अपने परिवार के साथ उसी रात उछलता हुआ दूसरे तालाब चला गया।
सुबह जाल आ गए, और दुनिया भर की सारी तरकीबें बहुत देर से याद आईं।
देर से इस्तेमाल की गई चतुराई कोई चतुराई नहीं होती।
पहले से सोचनाक्या आप जानते हैं?
मेंढक नम रातों में नया तालाब ढूँढने के लिए ज़मीन पर हैरान कर देने वाली दूरी तय कर लेते हैं।
घर पर यह करके देखें
आज एक ऐसा काम कर लो जिसे तुम कल पर टालने वाले थे।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
मछुआरों के बारे में किसने चेताया?
जवाब: मेंढक ने
दोनों मछलियाँ किस पर भरोसा करती थीं?
जवाब: अपनी बहुत सी तरकीबों पर
इसकी सीख क्या है?
जवाब: देर से आई चतुराई बेकार है
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