गौरैया और बंदर
एक शाम ज़ोर की बारिश हुई, और एक बंदर डाल पर ठिठुरता बैठा था।
पास के अपने गरम, आरामदायक घोंसले से एक छोटी गौरैया उसे देख रही थी।
उसने पुकारा, "तुम मेरे जैसा घर क्यों नहीं बनाते? तुम्हारे तो हाथ हैं, मेरे पास तो बस चोंच है।"
बंदर पहले से ठंडा और थका था, और अब शर्मिंदा भी हो गया।
गुस्से में उसने डाल हिला दी, और गौरैया का मेहनत से बना घोंसला बारिश में गिर पड़ा।
गौरैया ने सीखा कि अच्छी सलाह भी प्यार से ही देनी चाहिए।
सच्ची सलाह भी अगर रूखेपन से दी जाए तो चोट पहुँचाती है।
प्यार से सलाहक्या आप जानते हैं?
बया पक्षी अपनी चोंच से सैकड़ों गाँठें बाँधकर लटकता हुआ घोंसला बनाता है।
घर पर यह करके देखें
आज कोई काम की बात कहो, पर प्यार से कहो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
बंदर क्यों ठिठुर रहा था?
जवाब: बारिश हो रही थी
गौरैया की सलाह में क्या गड़बड़ थी?
जवाब: वह रूखी थी
इसकी सीख क्या है?
जवाब: सलाह प्यार से दो
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