शेर बनाने वाले
तीन विद्वान अपने एक ऐसे दोस्त के साथ सफर कर रहे थे जो पढ़ा-लिखा नहीं था पर समझदार बहुत था।
जंगल में उन्हें घास में पड़ी एक शेर की पुरानी हड्डियाँ मिलीं।
उन्होंने कहा, "अपनी विद्या दिखाते हैं।" एक ने हड्डियाँ जोड़ीं, एक ने माँस चढ़ाया, तीसरा जान डालने को तैयार हुआ।
उनका सीधा-सादा दोस्त बोला, "रुको। यह शेर है। पहले मुझे इस पेड़ पर चढ़ जाने दो।"
वे उस पर हँसे, पर वह फिर भी चढ़ गया, बिल्कुल ऊपर तक।
जब शेर ने आँखें खोलीं, तो सिर्फ पेड़ पर बैठा दोस्त ही घर लौटकर यह किस्सा सुना सका।
व्यावहारिक समझ के बिना चतुराई खतरनाक होती है।
व्यावहारिक समझक्या आप जानते हैं?
यह कहानी भारत में इतनी मशहूर है कि विद्वान आज भी इसे "बिना समझ के ज्ञान" की चेतावनी के रूप में सुनाते हैं।
घर पर यह करके देखें
कोई चतुर काम करने से पहले पूछो: क्या यह सचमुच अच्छा विचार है?
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
विद्वानों को क्या मिला?
जवाब: एक शेर की हड्डियाँ
सीधे-सादे दोस्त ने क्या किया?
जवाब: एक पेड़ पर चढ़ गया
इसकी सीख क्या है?
जवाब: चतुराई के साथ समझ ज़रूरी है
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