फँसा हुआ हिरण
एक सुबह हिरण झील पर नहीं आया। उसके दोस्तों को चिंता हुई।
कौआ ऊँचा उड़कर ढूँढने गया। उसने हिरण को शिकारी की रस्सी में फँसा पाया।
वह चूहे को लाया, जो अपनी छोटी टाँगों से जितना तेज़ हो सका, दौड़ा आया।
कौए ने कहा, "रुको। कछुआ भी आ रहा है, भले धीरे-धीरे।"
चूहे ने रस्सी कुतर दी और हिरण छलाँग लगाकर आज़ाद हो गया।
फिर सबने मिलकर धीमे कछुए को घर पहुँचाया, क्योंकि दोस्त किसी को पीछे नहीं छोड़ते।
सच्चे दोस्त तब आते हैं जब ज़रूरत हो, भले ही मुश्किल हो।
दोस्तीक्या आप जानते हैं?
डरा हुआ हिरण लगभग तीन मीटर सीधे ऊपर छलाँग लगा सकता है।
घर पर यह करके देखें
उस दोस्त को फोन करो या मिलो जिससे बहुत दिन से बात नहीं हुई।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
फँसे हिरण को किसने खोजा?
जवाब: कौए ने
रस्सी किसने कुतरी?
जवाब: चूहे ने
इसकी सीख क्या है?
जवाब: ज़रूरत पर दोस्त आते हैं
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