राम ने जटायु को धन्यवाद कहा
जब राम लौटे, तो उन्हें सीता कहीं नहीं मिलीं। उनका मन घबरा गया।
तभी उन्हें अपने पुराने दोस्त जटायु मिले, जो इतनी कोशिश करने से थक गए थे।
जटायु ने राम से कहा, "रावण सीता को दक्षिण की ओर ले गया है। प्यारे दोस्त, मैंने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की।"
राम बहादुर गिद्ध के पास बैठ गए और उन्हें प्यार से थाम लिया। "धन्यवाद, जटायु," उन्होंने धीरे से कहा। "तुम सच्चे दोस्त हो। मैं तुम्हारा बहादुर दिल कभी नहीं भूलूँगा।"
राम ने जटायु की वफ़ादार मदद के लिए उन्हें प्यार और धन्यवाद से सम्मान दिया।
जो लोग तुम्हारी मदद के लिए पूरी कोशिश करते हैं, उन्हें हमेशा धन्यवाद कहो।
कृतज्ञताक्या आप जानते हैं?
राम ने गिद्ध जटायु को उतना ही प्यार दिया जितना वे घर के किसी बड़े को देते।
घर पर यह करके देखें
जिसने तुम्हारी मदद की कोशिश की, उसे धन्यवाद कहो, भले ही सब ठीक न हुआ हो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
मदद करते-करते थके हुए कौन मिले?
जवाब: जटायु
रावण सीता को किस ओर ले गया?
जवाब: दक्षिण
राम ने जटायु को क्या दिया?
जवाब: प्यार और धन्यवाद
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