राम ने सच बोला
एक दिन खेलते-खेलते राम से गलती से एक सुंदर मिट्टी का घड़ा गिर गया। वह टुकड़े-टुकड़े हो गया।
किसी ने यह होते नहीं देखा। राम चुप रह सकते थे। पर वे चुप नहीं रहे।
वे सीधे महल के सहायक के पास गए और बोले, "मुझे माफ़ करना। मुझसे गलती से घड़ा टूट गया।"
सहायक हैरान रह गया। "तुमने सच बोला, जबकि किसी ने देखा भी नहीं था। यह तो बहुत बहादुरी की बात है।"
राम ने टुकड़े साफ़ करने में मदद की। उनका दिल हल्का और खुश हो गया, क्योंकि सच बोलकर हमेशा अच्छा लगता है।
सच बोलना बहादुरी है, चाहे कोई देख न रहा हो।
सच्चाईक्या आप जानते हैं?
राम को अक्सर "मर्यादा पुरुषोत्तम" कहा जाता है, जिसका मतलब है "सही काम करने में सबसे अच्छा।"
घर पर यह करके देखें
अगर आज तुमसे कोई गलती हो जाए, तो उसके बारे में सच बोलो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
राम से क्या टूटा?
जवाब: मिट्टी का घड़ा
क्या किसी ने उन्हें तोड़ते देखा?
जवाब: नहीं
राम ने क्या किया?
जवाब: सच बोल दिया
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