मिथिला का सफ़र
ऋषि ने कहा, "चलो मिथिला राज्य चलते हैं। वहाँ एक खास उत्सव हो रहा है।"
रास्ता लंबा था। धूप तेज़ थी। राम और लक्ष्मण कई मील चले।
उन्होंने शिकायत नहीं की। उन्होंने जल्दबाज़ी नहीं की। वे रास्ते में गाते पंछियों और ऊँचे हरे पेड़ों का मज़ा लेते रहे।
"जो धीरज रखते हैं, उन्हें अच्छी चीज़ें मिलती हैं," राम ने मुस्कुराकर कहा।
कदम-कदम चलकर, धीरज के साथ, वे आख़िरकार सुंदर मिथिला नगरी पहुँच गए।
धीरज लंबे सफ़र को भी खुशी भरा बना देता है।
धीरजक्या आप जानते हैं?
मिथिला जनक नाम के एक समझदार और प्यारे राजा का राज्य था।
घर पर यह करके देखें
जब तुम्हें किसी चीज़ के लिए इंतज़ार करना पड़े, तो धीरे से साँस लो और शांत रहो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
वे कहाँ जा रहे थे?
जवाब: मिथिला
लंबे रास्ते पर भाइयों ने कैसा बर्ताव किया?
जवाब: धीरज रखा
मिथिला के राजा कौन थे?
जवाब: जनक
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