सबसे अच्छा विद्यार्थी
हर सुबह राम और उनके भाई अपने समझदार गुरु वशिष्ठ से सीखने जाते थे।
राम हमेशा सीधे बैठते थे। वे दोनों कानों से ध्यान से सुनते थे। वे कभी बदतमीज़ी से नहीं बोलते थे।
जब गुरुजी अंदर आते, तो राम खड़े होकर प्रणाम करते। "सुप्रभात, गुरुजी," वे प्यारी मुस्कान के साथ कहते।
वे विनम्रता से सवाल पूछते। वे "कृपया" और "धन्यवाद" कहते। उन्हें हर पाठ याद रहता।
गुरुजी मुस्कुराए और सोचा, "यह बच्चा पढ़ाई का आदर करता है, इसीलिए इतना अच्छा सीखता है।"
जब हम अपने गुरुओं का आदर करते हैं, तो सबसे ज़्यादा सीखते हैं।
आदरक्या आप जानते हैं?
पुराने भारत में शिक्षक को "गुरु" कहा जाता था, जिसका मतलब है "जो हमें अँधेरे से उजाले की ओर ले जाए।"
घर पर यह करके देखें
अपने शिक्षक या जो तुम्हें कुछ सिखाता है, उसे "धन्यवाद" कहो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
राम के गुरु कौन थे?
जवाब: गुरु वशिष्ठ
गुरुजी के आने पर राम क्या करते थे?
जवाब: खड़े होकर प्रणाम करते थे
"गुरु" का मतलब क्या है?
जवाब: जो उजाले की ओर ले जाए
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