सीता हिम्मत नहीं हारीं
जब राम दूर गए हुए थे, तब रावण नाम का एक दूर देश का राजा सीता को अपने टापू वाले राज्य लंका ले गया।
अब सीता अपने घर से बहुत दूर थीं। पर उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी।
"मेरे राम मुझे लेने ज़रूर आएंगे," उन्होंने हिम्मत से खुद से कहा। "मुझे मज़बूत और अच्छी बनी रहना है।"
लंका में सीता मीठी बोली बोलती थीं, पर अपनी बात पर डटी रहीं। उनका दिल बहादुर था और उन्हें पक्का भरोसा था कि मदद आएगी।
उनकी हिम्मत अंधेरी जगह में एक छोटे दीये की तरह चमकती रही — गरम और कभी न बुझने वाली।
मुश्किल समय में भी हिम्मत रखो और दिल में उम्मीद बनाए रखो।
हिम्मत और उम्मीदक्या आप जानते हैं?
लंका में सीता जिस जगह रहीं, वहाँ एक सुंदर बगीचा था जिसे अशोक वाटिका कहते हैं।
घर पर यह करके देखें
जब कोई काम मुश्किल लगे, तो खुद से कहो, "मैं हिम्मत रख सकता हूँ।"
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
सीता को कहाँ ले जाया गया?
जवाब: लंका
क्या सीता ने उम्मीद छोड़ दी?
जवाब: नहीं, वे हिम्मत से रहीं
सीता को किस बात का भरोसा था?
जवाब: राम आएंगे
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