शबरी का लंबा इंतज़ार
जंगल में शबरी नाम की एक भली बूढ़ी माँ रहती थीं। वे बहुत-बहुत सालों से राम से मिलने का इंतज़ार कर रही थीं।
हर एक दिन वे रास्ता साफ़ करतीं। ताज़े फल तोड़तीं। और कहतीं, "शायद आज राम आ जाएँ।"
साल बीतते गए, पर शबरी का धीरज और उम्मीद कभी कम नहीं हुई। उनका प्यार उन्हें खुश मन से इंतज़ार कराता रहा।
फिर एक सुनहरे दिन, राम सच में उनके रास्ते पर चले आए!
शबरी का लंबा, धीरज भरा इंतज़ार आख़िर पूरा हो गया। उनकी आँखें खुशी के आँसुओं से भर गईं।
अच्छी चीज़ों के लिए धीरज और उम्मीद से इंतज़ार करना सही होता है।
धीरजक्या आप जानते हैं?
शबरी को राम की सबसे प्यारी और धीरज वाली दोस्तों में गिना जाता है।
घर पर यह करके देखें
आज बिना शिकायत किए धीरज से अपनी बारी का इंतज़ार करो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
शबरी किससे मिलने का इंतज़ार कर रही थीं?
जवाब: राम
वे हर दिन क्या करती थीं?
जवाब: रास्ता साफ़ करतीं और फल तोड़तीं
शबरी ने कैसे इंतज़ार किया?
जवाब: धीरज और उम्मीद से
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