राम और बड़ा समुंदर
पुल बनने से पहले राम गरजते हुए समुंदर के किनारे खड़े थे।
उन्हें उस पार जाना था, पर लहरें बहुत तेज़ थीं। राम ने न चिल्लाया, न समुंदर पर गुस्सा किया।
वे शांति से बैठ गए और आदर के साथ इंतज़ार करने लगे। उन्होंने प्यार से कहा, "कृपया हमें उस पार जाने का सुरक्षित रास्ता दिखाओ।"
राम शांत और आदर से भरे रहे। जल्दी ही एक अच्छा विचार आया — दोस्तों की मदद से एक पुल बनाया जाए।
शांत और आदर वाले रहकर राम को सबसे बढ़िया रास्ता मिल गया।
शांत और आदर वाले रहो, तो अच्छे रास्ते खुद मिल जाते हैं।
धीरज और आदरक्या आप जानते हैं?
कहानी में पुल की योजना बनने से पहले राम समुंदर के किनारे धीरज से बैठे रहे थे।
घर पर यह करके देखें
जब कोई बात परेशान करे, तो कुछ करने से पहले एक गहरी शांत साँस लो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
राम के सामने क्या था?
जवाब: तेज़ लहरों वाला समुंदर
राम ने समुंदर के साथ कैसा बर्ताव किया?
जवाब: शांत और आदर से
कौन-सा अच्छा विचार आया?
जवाब: पुल बनाने का
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