लक्ष्मण ठीक हो गए
हनुमान ने पहाड़ को धीरे से नीचे रखा। समझदार वैद्य जी ने झट से वह खास पौधा ढूँढ़ लिया।
थोड़ी ही देर में लक्ष्मण ने आँखें खोलीं और उठकर बैठ गए — बिल्कुल ठीक और ताकतवर! सब खुशी से नाच उठे।
लक्ष्मण ने हनुमान की ओर देखा और मुस्कुराए। "आप सिर्फ़ मेरे लिए इतनी दूर उड़े और पूरा पहाड़ उठा लाए। धन्यवाद, प्यारे दोस्त।"
राम ने भी हनुमान को गले लगाया। "आपने मेरे भाई को बचा लिया," उन्होंने कहा, और उनकी आँखें आभार से चमक उठीं।
हनुमान के बड़े, मदद करने वाले दिल के लिए सबने खूब आभार माना।
जब कोई तुम्हारी मदद करे, तो सच्चे मन से आभार मानो और धन्यवाद कहो।
आभारक्या आप जानते हैं?
कहानी में वह दवा वाली जड़ी-बूटी चमकती थी, ताकि अँधेरे में भी मिल जाए।
घर पर यह करके देखें
आज उस इंसान को धन्यवाद कहो, जिसने तुम्हारी मदद के लिए खास मेहनत की।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
कौन फिर से ठीक हो गया?
जवाब: लक्ष्मण
वैद्य जी ने किसका इस्तेमाल किया?
जवाब: खास पौधे का
सबको हनुमान के लिए कैसा लगा?
जवाब: आभारी
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