एक ऋषि को मदद चाहिए
एक दिन विश्वामित्र नाम के एक समझदार बुज़ुर्ग ऋषि महल में आए।
"मुझे मदद चाहिए," उन्होंने प्यार से कहा। "जंगल में कुछ शरारती लोग हमारी शांत पूजा में बाधा डालते हैं। क्या नन्हे राम आकर हमारी मदद करेंगे?"
राजा दशरथ चिंता में पड़ गए, क्योंकि राम अभी छोटे थे। पर राम बहादुरी से आगे बढ़े।
"मैं मदद करूँगा, पिताजी," राम बोले। "जब किसी को हमारी ज़रूरत हो, तो हमें मुँह नहीं मोड़ना चाहिए।"
लक्ष्मण भी साथ चले। दोनों भाई जंगल के अच्छे लोगों की रक्षा करने के लिए ऋषि के साथ गए।
दूसरों की मदद करना अब उनका ज़रूरी काम था।
जब किसी को सचमुच मदद चाहिए, तो वही बनो जो कहे "मैं करूँगा।"
ज़िम्मेदारीक्या आप जानते हैं?
ऋषि विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण को अच्छे लोगों की रक्षा करने के लिए कई खास हुनर सिखाए।
घर पर यह करके देखें
किसी के कहने से पहले ही उसकी मदद करने के लिए आगे बढ़ो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
मदद माँगने महल में कौन आया?
जवाब: ऋषि विश्वामित्र
राम ने क्या कहा?
जवाब: "मैं मदद करूँगा"
राम के साथ कौन गया?
जवाब: लक्ष्मण
इस कहानी को जीवंत बनाइए
Superkids ऐप में आपका बच्चा यही कहानी तस्वीरों के साथ पढ़ता है, सुनता भी है, सवालों का जवाब खेल-खेल में देता है, और हर पूरी कहानी पर सितारे कमाता है।
मुफ़्त शुरू करेंकार्ड की ज़रूरत नहीं।