नन्ही गिलहरी की मदद
सीता तक पहुँचने के लिए राम के दोस्तों ने समुद्र पर एक लंबा पुल बनाना शुरू किया। बड़े वानर बड़े-बड़े पत्थर ढो रहे थे। काम बहुत मुश्किल था!
एक नन्ही गिलहरी यह सब देख रही थी। वह भी मदद करना चाहती थी। वह बहुत छोटी थी, पर उसका दिल बड़ा था।
वह रेत में लोटती, फिर पुल तक दौड़कर पत्थरों के बीच अपनी रेत झाड़ देती। वह बार-बार, आगे-पीछे दौड़ती रही।
कुछ वानर हँस पड़े। "तू तो मदद करने के लिए बहुत छोटी है!" पर नन्ही गिलहरी रुकी नहीं।
रेत का हर छोटा-सा कण पुल को मजबूत बनाने में काम आया।
कोई मददगार छोटा नहीं होता। हर छोटी मदद कीमती होती है।
हर छोटी मदद कीमती हैक्या आप जानते हैं?
नन्ही गिलहरी रामायण के सबसे प्यारे छोटे नायकों में से एक है।
घर पर यह करके देखें
किसी बड़े काम में अपनी छोटी-सी मदद ज़रूर करो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
दोस्त क्या बना रहे थे?
जवाब: एक पुल
नन्ही गिलहरी ने कैसे मदद की?
जवाब: वह रेत लाती रही
इस कहानी की सीख क्या है?
जवाब: हर छोटी मदद कीमती है
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