चारों भाई फिर से साथ
इतने सारे सफ़र के बाद, चारों भाई आख़िरकार अयोध्या में फिर से साथ थे।
राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न साथ बैठे, बिलकुल वैसे ही जैसे बचपन में बैठा करते थे।
वे हँसते थे। वे कहानियाँ सुनाते थे। वे प्यार से मिलकर राज्य चलाते थे।
"परिवार से कीमती कुछ भी नहीं," राम ने अपने भाइयों को गले लगाते हुए कहा।
अच्छे दिनों में और मुश्किल दिनों में, चारों भाइयों ने हमेशा एक-दूसरे से प्यार किया। अब वे फिर से खुशी-खुशी साथ थे।
परिवार का प्यार बहुत कीमती है। अपने भाई-बहनों से प्यार करो।
परिवार का प्यारक्या आप जानते हैं?
चारों भाइयों का प्यार रामायण के सबसे सुंदर हिस्सों में से एक है।
घर पर यह करके देखें
अपने भाई, बहन या भाई-बहन जैसे किसी दोस्त के लिए कुछ प्यार भरा काम करो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
कौन फिर से साथ थे?
जवाब: चारों भाई
उन्होंने साथ में क्या किया?
जवाब: हँसे और कहानियाँ सुनाईं
राम ने सबसे कीमती क्या बताया?
जवाब: परिवार
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