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हनुमान ने सीता को दिलासा दिया

कहानी 53 हनुमान और सेतु 2 मिनट में पढ़ें 3–10 साल

सीता अपने घर से बहुत दूर थीं और राम को याद कर रही थीं। हनुमान उन्हें अच्छा महसूस कराना चाहते थे।

बहुत धीरे से, ताकि वे डर न जाएँ, हनुमान बोले, "उदास मत होइए, प्यारी सीता। मैं हनुमान हूँ, राम का दोस्त।"

सीता की आँखों में खुशी के आँसू भर आए। आखिर कोई तो आया!

"राम आपसे बहुत प्यार करते हैं और आपकी मदद के लिए आ रहे हैं," हनुमान ने प्यार से कहा। "अपने दिल में उम्मीद बनाए रखिए।"

उनके प्यारे, दिलासा देने वाले शब्द सीता के चारों ओर उम्मीद के गरम कंबल की तरह लिपट गए।

कहानी की सीख

प्यारे और दिलासा देने वाले शब्द उदास दिल में उम्मीद भर देते हैं।

दयालुता
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क्या आप जानते हैं?

हनुमान को उनकी बड़ी ताकत के साथ-साथ उनके प्यारे दिल के लिए भी बहुत चाहा जाता है।

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घर पर यह करके देखें

जो अकेला महसूस कर रहा हो, उसे प्यार भरे शब्दों से दिलासा दो।

बातचीत के सवाल

कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।

हनुमान सीता से कैसे बोले?

जवाब: धीरे और प्यार से

हनुमान ने उनसे क्या कहा?

जवाब: राम मदद के लिए आ रहे हैं

सीता को उनके शब्द कैसे लगे?

जवाब: उम्मीद के गरम कंबल जैसे

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