भरत का सच्चा इंतज़ार
पूरे चौदह साल तक भरत सच्चे मन से राम के घर लौटने का इंतज़ार करते रहे।
हर दिन वे राज्य की देखभाल करते और राम की खड़ाऊँ हमेशा सिंहासन पर रखते। उन्होंने अपने भाई को कभी नहीं भुलाया।
जब उन्होंने सुना कि राम आ रहे हैं, तो भरत का दिल खुशी से उछल पड़ा!
वे आँखों में खुशी के आँसू लिए राम का स्वागत करने दौड़े। उनका लंबा, सच्चा इंतज़ार पूरा हो गया था।
भरत इतने सालों तक सच्चे और वफ़ादार बने रहे, और अब उनके प्यार भरे भरोसे का इनाम मिल गया।
लंबे समय तक भी सच्चा और वफ़ादार बने रहना बहुत सुंदर बात है।
वफ़ादारीक्या आप जानते हैं?
भरत पूरे चौदह साल जंगल में रहने वाले राम की तरह सादगी से रहे।
घर पर यह करके देखें
अपने किसी वादे या अपने किसी प्यारे इंसान के प्रति सच्चे बने रहो।
बातचीत के सवाल
कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।
भरत ने कितने समय इंतज़ार किया?
जवाब: चौदह साल
उन्होंने सिंहासन पर क्या रखा था?
जवाब: राम की खड़ाऊँ
राम के घर लौटने पर भरत को कैसा लगा?
जवाब: बहुत खुशी
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