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सीता आज़ाद हुईं

कहानी 73 रामराज्य 1 मिनट में पढ़ें 3–10 साल

आख़िरकार वह खुशी वाला दिन आ गया। सीता आज़ाद हो गईं!

उन्होंने इतने लंबे समय तक इंतज़ार किया था और पूरे समय बहादुर और उम्मीद से भरी रहीं। अब उनका इंतज़ार खत्म हुआ।

सीता बड़ी-सी खुश मुस्कान लिए धूप में बाहर निकलीं। उनकी उम्मीद सच हो गई थी।

"मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी," उन्होंने धीरे से कहा, "और मेरी उम्मीद का इनाम मिल गया।"

सारे दोस्त खुशी से झूम उठे। सबसे बहादुर और सबसे धीरज वाले दिल को उसकी खुशी मिल गई थी।

कहानी की सीख

दिल में उम्मीद रखो, अच्छी चीज़ें सच हो सकती हैं।

उम्मीद का इनाम
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क्या आप जानते हैं?

सीता को इसलिए बहुत माना जाता है कि वे इतने लंबे इंतज़ार में भी बहादुर और उम्मीद से भरी रहीं।

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घर पर यह करके देखें

उम्मीद रखो और कोशिश करते रहो, भले ही किसी काम में लंबा समय लगे।

बातचीत के सवाल

कहानी पढ़ने के बाद ये पूछें। हर सवाल के नीचे जवाब दिया है।

आख़िर में सीता के साथ क्या हुआ?

जवाब: वे आज़ाद हो गईं

इंतज़ार के समय सीता कैसी रहीं?

जवाब: बहादुर और उम्मीद से भरी

किसका इनाम मिला?

जवाब: उनकी उम्मीद का

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